A trip to Haroa: Field visit in COVID-19 times

इस समय कक्षावार पढ़ाई कतई नहीं होनी चाहिए। आज पहली से लेकर आठवीं तक के बच्चों की नींव को पुख्ता करना पूरी शिक्षा-व्यवस्था का एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए।

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‘स्कूली पढ़ाई की बुनियाद मजबूत करने का समय’

इस समय कक्षावार पढ़ाई कतई नहीं होनी चाहिए। आज पहली से लेकर आठवीं तक के बच्चों की नींव को पुख्ता करना पूरी शिक्षा-व्यवस्था का एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए।

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‘बच्चे बातचीत कर, चर्चा कर किताब पढ़ते-समझते हैं तो उम्र या कक्षा को पीछे छोड़ देते हैं, बच्चों के लिए पढ़ाई के साथ बातचीत और गपशप भी जरूरी’

किताब और कहानियों पर जितनी गहराई से बातचीत होती है, उतनी ही समझ बनती है और अपने आसपास की जिंदगी से जोड़ सकते हैं। इस विषय में और जानने के लिए पढ़ें डॉ. रुक्मिणी बनर्जी का कॉलम|

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‘पहली कक्षा से पहले की पढ़ाई भी बच्चों के लिए बेहद जरूरी है, कोरोना से पूर्व-प्राथमिक शिक्षा हुई प्रभावित’

बच्चों की उम्र और विकास के स्तर के आधार पर ही उपयुक्त गतिविधियां, सामग्री होनी चाहिए। इस विषय में और जानने के लिए पढ़ें डॉ. रुक्मिणी बनर्जी का कॉलम|

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View: As India plans to reopen classrooms, ‘teaching the children’ must replace ‘teaching the curriculum’

Most children are several years behind the grade level and, therefore, find it impossible to follow. So, teachers tend to default to teaching the few children who can follow the curriculum, and let the rest manage on their own. This reinforces the inequity in the classroom. The result is that children who once fall behind rarely catch up.

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महामारी से बढ़ी परेशानी, किस उम्र में मिले कैसी शिक्षा, बच्चों के विकास की बुनियाद पर ध्यान दें

“आज जिस बच्चे का नाम कक्षा दो में लिखा है, वो कभी स्कूल गया ही नहीं है। जब स्कूल खुलेंगे, उसे किस पाठ्यक्रम, किस पाठ्यपुस्तक से पढ़ाएंगे? इन महत्वपूर्ण प्रशनों को लेके पढ़ें रुक्मिणी बनर्जी का कॉलम|

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